आराधना की माता सूर्यमति का कहना है कि कौन नहीं चाहता की उनकी बेटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करे, लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से बेटी का सपना पूरा नहीं हो सका। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी संजय शर्मा व जिला हैंडबॉल संघ के सचिव अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि हमने काफी प्रयास किया कि कहीं से फंड का इंतजाम हो जाए लेकिन हम असमर्थ रहे।
छह बार राष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता खेल चुकी आराधना त्रिपाठी (17) का इस्तांबुल में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में खेलने का सपना साकार नहीं हो सका। उनके पास 1,80,000 रुपये नहीं थे, इस वजह से वह प्रतियोगिता में भाग लेने नहीं जा सकीं। तीस जुलाई से नौ अगस्त तक तुर्की के इस्तांबुल विश्व चैंपियनशिप का आयोजन हुआ था।शहर के मूड़घाट निवासी स्व. सुनील कुमार त्रिपाठी और सूर्यमति की बेटी आराधना जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर दर्ज करा चुकी हैं। आराधना ने बताया कि आठ अप्रैल को विश्व चैंपियनशिप के खिलाड़ियों का चयन का ट्रायल लखनऊ में किया गया। जिसमें मेरा चयन हुआ था। तुर्की के इस्तांबुल जाने के लिए एक लाख अस्सी हजार रुपये लग रहे थे, लेकिन परिवार के पास इतने रुपये न होने के कारण खेलने नहीं जा पाई।आराधना की माता सूर्यमति का कहना है कि कौन नहीं चाहता की उनकी बेटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करे, लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से बेटी का सपना पूरा नहीं हो सका। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी संजय शर्मा व जिला हैंडबॉल संघ के सचिव अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि हमने काफी प्रयास किया कि कहीं से फंड का इंतजाम हो जाए लेकिन हम असमर्थ रहे।
अयोध्या में ले रही प्रशिक्षण
आराधना अयोध्या स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय क्रीड़ा संकुल ढावा सीमर छात्रावास में हैंडबॉल का प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने कजाकिस्तान में मार्च 2022 में आयोजित नौवीं एशियन वूमेन यूथ हैंडबॉल चैंपियनशिप में भारतीय टीम का हिस्सा बनी थीं। आराधना हैंडबाल की प्रारंभिक बारीकियां अमर शहीद सत्यवान सिंह क्षेत्रीय क्रीड़ा स्टेडियम से सीखी हैं। यहीं अभ्यास करते हुए उनका चयन छात्रावास में हुआ था।

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