शहर की सरकार बनाने में जहां करोड़पति लगातार अपने हाथ आजमाते जा रहे हैं तो वहीं जनता जनार्दन भी इन्हें चुनने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। पिछले नगर निकाय चुनाव की बात करें तो इस चुनाव में 586 ऐसे उम्मीदवार चुनाव जीत गए थे जिनकी संपत्ति एक करोड़ से ज्यादा थी। महापौर के चुनावी रण में तो 16 में से 13 ऐसे उम्मीदवार जीते तो करोड़पति थे। इस बार भी ऐसे खूब उम्मीदवार मैदान में कूद रहे हैं।



चुनाव में धनबल का प्रयोग बढ़ता ही जा रहा है। हालांकि इस चुनाव में भी राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी प्रत्याशियों के लिए खर्च सीमा तय की है और सख्ती से निर्देश दिए हैं कि चुनाव खर्च पर पैनी नजर रखी जाए। बावजूद इसके गुपचुप धन खर्च करने की शिकायतें मिलती रही हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में तो करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है पर निकाय चुनाव में भी स्थिति ऐसी ही हो गई है। बड़ी संख्या ऐसे करोड़पतियों की है जो चुनाव जीत गए। चाहे नगर निगम में महापौर पद हो, नगर पालिका अध्यक्ष या फिर नगर पंचायत सभी पर करोड़ पतियों के जीतने वालों की भरमार है। नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए संपत्ति घोषणा शपथ पत्र में चल और अचल संपत्तियों का जो ब्यौरा दिया गया है उसके हिसाब से पिछले चुनाव में नगर पंचायत अध्यक्ष पर ही सौ से ज्यादा प्रत्याशी ऐसे जीते जिनकी संपत्ति एक करोड़ के पार थी।
सदस्य भी किसी से कम नहीं
पार्षद या सदस्य भी संपत्ति के मामले में अध्यक्ष या महापौर से कम नहीं है। नगर निकाय चुनाव 2017 में 391 पार्षद और सदस्य ऐसे रहे जिनकी संपत्ति करोड़ों में थी। चल और अचल संपत्ति का योग कई करोड़ था और यदि उनके जीवन साथी की सपंत्ति का आंकड़ा भी जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा और ज्यादा बढ़ जाता है। कई उम्मीदवारों के तो जीवन साथी के नाम संपत्ति ज्यादा थी।

इस बार भी करोड़पतियों की संख्या कम नहीं
पहले चरण के लिए 37 जिलों में चुनाव हो रहा है। इस बार भी दस नगर निगमों में करोड़पतियों की संख्या कम नहीं है। अभी तक निगमों में ही 30 से ज्यादा करोड़ पति उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल कर चुके हैं। लखनऊ की बात करें तो यहां की बसपा प्रत्याशी शाहीन बानो के पास 27 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। कांग्रेस उम्मीदवार संगीता जायसवाल के पास सात करोड़ तो भाजपा प्रत्याशी सुषमा खर्कवाल के पास दो करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है। वाराणसी में भाजपा, कांग्रेस, बसपा तीनों महापौर पद के उम्मीदवार करोड़पति हैं। मुरादाबाद में सपा कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी करोड़पति हैं। अन्य जिलों में भी ऐसा ही है।

खर्च पर रहेगी निगाह
चुनाव में प्रत्याशी तय सीमा से ज्यादा खर्च न कर सकें, इस पर निर्वाचन आयोग की पैनी नजर रहेगी। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार ने इस बाबत सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उड़न दस्ते बनाने को कहा है। कहा है कि प्रत्याशियों के खर्च पर लगातार निगहबानी की जाए। यह देखा जाए कि मतदाताओं को लुभाने या प्रभावित करने के लिए धनबल का इस्तेमाल तो नहीं किया जा रहा है। इसके नियमित चेकिंग अभियान चलाने को भी कहा गया है। यदि कहीं इस तरह की सूचना आती है तो तत्काल सख्त एक्शन करने के निर्देश दिए गए हैं।