अस्सी के दशक के शुरुआती समय में ही जरनैल सिंह भिंडरांवाले और उसके समर्थक हिंदुओं को निशाना बनाने लगे थे। इस दौरान भिंडरांवाले की विचारधारा के मुखर आलोचक रहे अखबार के मालिक लाला जगत नारायण की हत्या कर दी गई।
पंजाब के काले दौर में आतंकवादियों ने 20 हजार हिंदुओं और सिखों को मौत के घाट उतार दिया। साल 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पंजाब का माहौल और बिगड़ गया। यह स्थिति 1995 तक बनी रही। 1987 में आतंकवादियों ने हरियाणा में बस पर हमला करके 34 हिंदुओं और पंजाब में भी बस पर हमला करके 38 हिंदुओं की हत्या कर दी।
/हिंदू व सिखों के बीच गहरी खाई बनती जा रही थी। हिंदुओं और सिखों के बीच ऐसी खाई बनने लगी कि कई हिंदू वहां से पलायन करने पर मजबूर हो गए। ये हिंदू वो थे, जिन्होंने सिखों के साथ ही देश के विभाजन का दंश झेला था।
पंजाब में दो दशकों से अधिक समय तक उग्रवाद के बाद, अकाली दल ने 1997 के विधानसभा चुनावों में हिंदू-सिख भाईचारे के मुद्दे पर भाजपा के साथ हाथ मिला लिया और इसकी पहल प्रकाश सिंह बादल ने की थी। उन्होंने इसे नाखून व मांस का रिश्ता बताया।
प्रकाश सिंह बादल की कैबिनेट में भाजपा के मंत्रियों को उचित स्थान मिला
पंजाब में दो दशकों से अधिक समय तक उग्रवाद के बाद, अकाली दल ने 1997 के विधानसभा चुनावों में हिंदू-सिख भाईचारे के मुद्दे पर भाजपा के साथ हाथ मिला लिया और इसकी पहल प्रकाश सिंह बादल ने की थी। उन्होंने इसे नाखून व मांस का रिश्ता बताया।
हिंदू व सिखों के बीच दूरियां भाजपा से गठबंधन कर दूर की
2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में 57.69 फीसदी सिख, 38.49 फीसदी हिंदू, 1.93 फीसदी मुस्लिम और 1.26 फीसदी ईसाई आबादी थी। हिंदू व सिखों के बीच दूरियां कम करने के लिए प्रकाश सिंह बादल ने सियासत का पैंतरा खेला और भाजपा के साथ मिलकर 1997 में सरकार का गठन किया।
इसी सरकार में भाजपा के मनोरंजन कालिया मंत्री बने। मनोरंजन कालिया के पिता मनमोहन कालिया भी प्रकाश सिंह बादल की कैबिनेट में मंत्री रह चुके थे और दूसरी पीढ़ी में मनोरंजन कालिया ने पिता का स्थान लिया, लेकिन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ही रहे।
इसी सरकार में भाजपा के मनोरंजन कालिया मंत्री बने। मनोरंजन कालिया के पिता मनमोहन कालिया भी प्रकाश सिंह बादल की कैबिनेट में मंत्री रह चुके थे और दूसरी पीढ़ी में मनोरंजन कालिया ने पिता का स्थान लिया, लेकिन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ही रहे।
प्रकाश सिंह बादल की कैबिनेट में भाजपा के मंत्रियों को उचित स्थान मिला
मनोरंजन कालिया अतीत में जाते हुए कहते हैं कि बादल साहब पंजाब के सीएम थे, उनके लिए जात-पात मायने नहीं रखती थी। 1997 में हमारी गठबंधन की सरकार बनी, तो उसके बाद हिंदुओं में एक आशा की किरण जागी। प्रकाश सिंह बादल की कैबिनेट में भाजपा के मंत्रियों को उचित स्थान दिया गया और इसके जरिए ही हिंदुओं में हमने विश्वास पैदा किया।
कट्टरपंथियों पर सख्ती, हर व्यक्ति से गर्मजोशी से मिलते
मनोरंजन कालिया कहते हैं कि कई बार ऐसे मौके आए कि हिंदू-सिख भाईचारे में दरार पड़ सकती थी, लेकिन हमेशा उन्होंने मामले को तत्काल निपटाने में अहम भूमिका अदा की। हमेशा जब भी मुलाकात करनी होती थी तो प्रकाश सिंह बादल दिए गए वक्त से पांच मिनट पहले पहुंच जाया करते थे।
मुझे याद है कि एक बाद 1998 में मुझे उनसे मिलना था और तय समय 9 बजे था, लेकिन मैं हैरान रह गया कि प्रकाश सिंह बादल 8.50 पर ही आकर बैठ गए थे और गेट पर संदेशा था कि मनोरंजन कालिया आ रहे हैं। उनका इंतजार हो रहा है। जब भी मिलना होता तो हमेशा कहते थे कि शहरी वर्ग के लिए स्कीम लाओ, कैसे व्यापारी वर्ग को पंजाब में दोबारा खड़ा किया जा सकता है?
मुझे याद है कि एक बाद 1998 में मुझे उनसे मिलना था और तय समय 9 बजे था, लेकिन मैं हैरान रह गया कि प्रकाश सिंह बादल 8.50 पर ही आकर बैठ गए थे और गेट पर संदेशा था कि मनोरंजन कालिया आ रहे हैं। उनका इंतजार हो रहा है। जब भी मिलना होता तो हमेशा कहते थे कि शहरी वर्ग के लिए स्कीम लाओ, कैसे व्यापारी वर्ग को पंजाब में दोबारा खड़ा किया जा सकता है?
आतंकवाद के काले दौर के दौरान काफी व्यापारी पंजाब से पलायन कर गए थे और बाहरी प्रदेशों से व्यापारी आने से घबराते थे। प्रकाश सिंह बादल ने व्यापारियों की पीठ पर हाथ रखा और हमेशा उनको हौसला व आगे बढ़ने के लिए नई योजनाएं लाने के लिए मुझे प्रेरित किया। यह सिर्फ इसलिए था कि किसी तरह से हिंदू सिख भाईचारे में दरार न आए, व्यापारी भाजपा पर भरोसा करता था। इसमें हम कामयाब भी हुए और वह सिर्फ प्रकाश सिंह बादल की बदौलत। कई बार ऐसे मौके भी आए कि कट्टरपंथियों ने पंजाब में माहौल खराब करने की कोशिश की, लेकिन प्रकाश सिंह बादल ने उनके साथ सख्ती से निपटा, यही उनकी खासियत थी।
अस्सी के दशक के शुरुआती समय में ही जरनैल सिंह भिंडरांवाले और उसके समर्थक हिंदुओं को निशाना बनाने लगे थे। इस दौरान भिंडरांवाले की विचारधारा के मुखर आलोचक रहे अखबार के मालिक लाला जगत नारायण की हत्या कर दी गईपंजाब के काले दौर में आतंकवादियों ने 20 हजार हिंदुओं और सिखों को मौत के घाट उतार दिया। साल 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पंजाब का माहौल और बिगड़ गया। यह स्थिति 1995 तक बनी रही। 1987 में आतंकवादियों ने हरियाणा में बस पर हमला करके 34 हिंदुओं और पंजाब में भी बस पर हमला करके 38 हिंदुओं की हत्या कर दी। हिंदू व सिखों के बीच गहरी खाई बनती जा रही थी। हिंदुओं और सिखों के बीच ऐसी खाई बनने लगी कि कई हिंदू वहां से पलायन करने पर मजबूर हो गए। ये हिंदू वो थे, जिन्होंने सिखों के साथ ही देश के विभाजन का दंश झेला थापंजाब में दो दशकों से अधिक समय तक उग्रवाद के बाद, अकाली दल ने 1997 के विधानसभा चुनावों में हिंदू-सिख भाईचारे के मुद्दे पर भाजपा के साथ हाथ मिला लिया और इसकी पहल प्रकाश सिंह बादल ने की थी। उन्होंने इसे नाखून व मांस का रिश्ता बताया।
हिंदू व सिखों के बीच दूरियां भाजपा से गठबंधन कर दूर की
2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में 57.69 फीसदी सिख, 38.49 फीसदी हिंदू, 1.93 फीसदी मुस्लिम और 1.26 फीसदी ईसाई आबादी थी। हिंदू व सिखों के बीच दूरियां कम करने के लिए प्रकाश सिंह बादल ने सियासत का पैंतरा खेला और भाजपा के साथ मिलकर 1997 में सरकार का गठन किया। इसी सरकार में भाजपा के मनोरंजन कालिया मंत्री बने। मनोरंजन कालिया के पिता मनमोहन कालिया भी प्रकाश सिंह बादल की कैबिनेट में मंत्री रह चुके थे और दूसरी पीढ़ी में मनोरंजन कालिया ने पिता का स्थान लिया, लेकिन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ही रहे।
प्रकाश सिंह बादल की कैबिनेट में भाजपा के मंत्रियों को उचित स्थान मिला
मनोरंजन कालिया अतीत में जाते हुए कहते हैं कि बादल साहब पंजाब के सीएम थे, उनके लिए जात-पात मायने नहीं रखती थी। 1997 में हमारी गठबंधन की सरकार बनी, तो उसके बाद हिंदुओं में एक आशा की किरण जागी। प्रकाश सिंह बादल की कैबिनेट में भाजपा के मंत्रियों को उचित स्थान दिया गया और इसके जरिए ही हिंदुओं में हमने विश्वास पैदा किया।
कट्टरपंथियों पर सख्ती, हर व्यक्ति से गर्मजोशी से मिलते
मनोरंजन कालिया कहते हैं कि कई बार ऐसे मौके आए कि हिंदू-सिख भाईचारे में दरार पड़ सकती थी, लेकिन हमेशा उन्होंने मामले को तत्काल निपटाने में अहम भूमिका अदा की। हमेशा जब भी मुलाकात करनी होती थी तो प्रकाश सिंह बादल दिए गए वक्त से पांच मिनट पहले पहुंच जाया करते थे।
मुझे याद है कि एक बाद 1998 में मुझे उनसे मिलना था और तय समय 9 बजे था, लेकिन मैं हैरान रह गया कि प्रकाश सिंह बादल 8.50 पर ही आकर बैठ गए थे और गेट पर संदेशा था कि मनोरंजन कालिया आ रहे हैं। उनका इंतजार हो रहा है। जब भी मिलना होता तो हमेशा कहते थे कि शहरी वर्ग के लिए स्कीम लाओ, कैसे व्यापाआतंकवाद के काले दौर के दौरान काफी व्यापारी पंजाब से पलायन कर गए थे और बाहरी प्रदेशों से व्यापारी आने से घबराते थे। प्रकाश सिंह बादल ने व्यापारियों की पीठ पर हाथ रखा और हमेशा उनको हौसला व आगे बढ़ने के लिए नई योजनाएं लाने के लिए मुझे प्रेरित किया। यह सिर्फ इसलिए था कि किसी तरह से हिंदू सिख भाईचारे में दरार न आए, व्यापारी भाजपा पर भरोसा करताइसमें हम कामयाब भी हुए और वह सिर्फ प्रकाश सिंह बादल की बदौलत। कई बार ऐसे मौके भी आए कि कट्टरपंथियों ने पंजाब में माहौल खराब करने की कोशिश की, लेकिन प्रकाश सिंह बादल ने उनके साथ सख्ती से निपटा, यही उनकी खासियत थी।

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